इस जीत के साथ एक नया अध्याय भी शुरू हुआ है.... सपने देखने और उन्हें साकार करने का
खुली आँख जब देखे सपने, खुले खिड़कियां
हाथ मसलते रह जाते सब तंज झिड़कियाँ
इस धरती से उस अम्बर तक हक अपना भी
लिए पताका बढ़ती जातीं आज लड़कियां
वंदना बाजपेयी
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